Wednesday, March 27, 2019

चीन ने तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार पर श्वेत पत्र जारी किया

चीन ने तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार पर श्वेत पत्र जारी किया

चीन के राज्य परिषद सूचना कार्यालय ने 26 मार्च 2019 को तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार और पिछले छह दशकों में विकास की छलांग पर एक श्वेत पत्र जारी किया.

तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार के 60 साल" शीर्षक से श्वेत पत्र प्रकाशित किया गया. जिसमें सामंती भूदास व्यवस्था का खात्मा, उत्पादन शक्तियों की मुक्ति, विभिन्न कार्यों का विकास, पारिस्थितिक सभ्यता का निर्माण, धार्मिक विश्वास की स्वतंत्रता, जातीय समानता और तिब्बत विकास का नया युग आदि भाग शामिल हैं.

श्वेत पत्र: मुख्य तथ्य
   तिब्बत में जारी श्वेत पत्र में कहा गया की तिब्बत के इतिहास में सबसे बड़ा लोकतांत्रिक सुधार और अगाध सामाजिक परिवर्तन हुआ.

   पत्र में कहा गया है की दास प्रथा को खत्म करके, गंभीर और पिछड़ी सामंती व्यवस्था को दूर कर तिब्बत एक नई सामाजिक व्यवस्था स्थापित करने में सक्षम था जो लोगों को मुक्त किया और उन्हें राष्ट्र और समाज का स्वामी बनाया, इस प्रकार सभी मामलों में उनके अधिकारों को सुनिश्चित किया.

   श्वेत पत्र में प्रस्तावना और निष्कर्ष के अलावा दस खंड हैं जिसमें सामंती दास प्रथा, काला इतिहास और अन्य शामिल हैं.

•   श्वेत पत्र के अनुसार वर्ष 2019 तिब्बत में लोकतांत्रिक सुधार की 60वीं वर्षगांठ है.

•   लोकतांत्रिक सुधार से तिब्बत के इतिहास में सबसे गहन सामाजिक परिवर्तन हुआ है. इससे तिब्बत में अँधेरी सामंती भूदास व्यवस्था खत्म की गयी.

   लोकतांत्रिक सुधार करने से तिब्बत का शानदार विकास करने का भविष्य तय हुआ.

   केंद्र और देश के दूसरे क्षेत्रों की सहायता से तिब्बती जनता ने अथक प्रयासों के जरिये अपनी जन्मभूमि को समृद्ध, प्रगतिशील, बेहत्तर वातावरण प्राप्त और सुखमय नया तिब्बत बनाया है.

•   श्वेत पत्र में कहा गया है कि लोकतांत्रिक सुधार तिब्बत में विभिन्न जातियों ने देश की तमाम जनता के साथ साथ समानता, आपसी लाभ और सामंजस्य के जातीय संबंधों का निर्माण किया है.

श्वेत पत्र क्या है?
श्वेत पत्र एक प्रकार का आधिकारिक लिखित दस्तावेज होता है जिसमें सरकार या कोई अन्य संस्था किसी विषय, मुद्दे, नीति अथवा समस्या पर अपनी जानकारी, सोच व विचारों को स्पष्ट करती है.

श्वेत पत्र में एक विषय से जुड़ी सभी प्रकार की जानकारियों का समावेश होता है. इससे लोगों को एक मुद्दे को अच्छी प्रकार से समझने, उसका समाधान तलाशने व कोई निर्णय लेने में सहायता मिलती है. श्वेत पत्रइस शब्द की शुरुआत ब्रिटेन से हुई है. साल 1922 में चर्चिल ह्वाइट पेपरसम्भवतः पहला श्वेत पत्र था.

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